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एशियाई खेल- दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बहु-खेल प्रतिस्पर्धा का संक्षिप्त इतिहास

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वर्ष 1948 की गर्मियों में लन्दन ओलंपिक खेलों के दौरान एशिया में सुदूर पूर्वी चैम्पियनशिप खेलों को प्रारम्भ करने के लिए बातचीत शुरू हुई थी।बाद में इसे रद्द कर दिया गया क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध की आशंकाओं के कारण क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। विश्व युद्ध की आशंकाओं के कारण जापान को लन्दन में आयोजित 1948 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में खेलने नहीं दिया गया था। एशियाई खेल संघ की बैठक में भी जापान के प्रतिनिधि को नहीं बुलाया गया। लेकिन अभिषेकात्मक एशियाई खेलों में जापान को भाग लेने दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार वर्ष 1951 में एशियाई खेल, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। प्रथम एशियाई खेल 4 मार्च से 11 मार्च, 1951 के दौरान आयोजित हुए थे। निर्णयों के अनुसार इन खेलों का आयोजन 1950 में होना था, लेकिन तैयारियों की देरी के चलते इन्हें वर्ष 1951 तक स्थगित करना पड़ा था। भारत ने वर्ष 1951 एशियाई खेल में 51 पदक जीते थे, जिसमें 15 स्वर्ण, 16 रजत और 20 कांस्य पदक शामिल थे।महाराजाधिराज महाराजा यादवेन्द्र सिंह ने इन खेलों के संगठन में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

प्रथम एशियाई खेल का लोगो:



नई दिल्ली, भारत में हुए खेल में 11 देशों ने भाग लिया था और भाग लेने वाले कुल 489 खिलाड़ी थे।स्पर्धाएँ 6 (एसोसिएशन फुटबॉल, एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, साइकिलिंग, तैराकी और भारोत्तोलन) थीं। उद्घाटन समारोह का आधिकारिक उद्घाटन राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद द्वारा किया गया था तथा मुख्य आयोजक स्थल ध्यान चन्द राष्ट्रीय स्टेडियम था।तत्पश्चात् वर्ष 1954 से हर चार साल के अंतराल के बाद खेल लगातार आयोजित किये जाने लगे। अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय खेल उत्सवों की तरह, एशियाई खेल भी राजनीतिक मतभेदों के आधार पर कई बहिष्कारों और बहिष्करणों के अधीन रहे। वर्ष 1963 में एशियाई साम्यवादी देशों ने GANEFO (नई उभरती ताकतों के लिए खेल) का गठन किया, जिसने वर्ष 1966 में इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशन की मंजूरी के बिना खेलों का आयोजन किया। सामान्य तौर पर, GANEFO का प्रदर्शन एशियाई खेलों की तुलना में बेहतर था, लेकिन केवल दो स्पर्धाएँ ही आयोजित हो पायी थी। वर्ष 1970 के दशक में साम्यवादी देशों ने एशियाई खेलों में पुनः शामिल होना निश्चित किया।

चीन, फिलीपींस और भारत के नेतृत्व में हुई वार्ता के बाद ने एशियाई खेलों की एकजुटता दर्शाने के लिए एक बड़ी योजना बनाई गई। जिसमें एशिया की सभी राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के भाग लेने के लिए पश्चिम एशियाई खेलों सहित पूरे महाद्वीप को शामिल किया गया। एशियाई खेलों को एशियाड के नाम से भी जाना जाता है।इसमें एशिया के विभिन्न देशों के खिलाड़ी ही भाग लेते हैं।

एशियाई खेल का ध्येय वाक्य “सदैव प्रगतिशील” है।तथा उद्देश्य, एशियाई महाद्वीप के देशों के लिए बहुक्रीड़ा प्रतियोगिताएँ हैं। इसका मुख्यालय दिल्ली, भारत में थी।वर्ष 1981 में, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के साथ अपने सहयोग को मजबूत करने के लिए एशियाई खेल महासंघ का नाम बदलकर एशियाई ओलंपिक परिषद कर दिया गया और इसका कार्यालय भारत से कुवैत में स्थानांतरित कर दिया गया जहां यह वर्तमान में स्थित है। इन खेलों का नियामक एशियाई ओलम्पिक परिषद द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक परिषद के पर्यवेक्षण में किया जाता है। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान के लिए स्वर्ण, दूसरे के लिए रजत और तीसरे के लिए कांस्य पदक दिए जाते हैं।


एशियाई खेलों का इतिहास 

प्रथम खेल नई दिल्ली- 1951 के बाद:

मनीला- 1954: दूसरे एशियाई खेल फ़िलीपीन्स की राजधानी मनीला में 1 से 9 मई 1954 के बीच आयोजित हुए।इन खेलों के उदघाटन की घोषणा राष्ट्रपति रैमन मैगसायसाय ने की थी और ये रिज़ाल मेमोरियल स्टेडियम में आयोजित हुए थे।

टोकियो-1958: तीसरे एशियाई खेलों का आयोजन जापान की राजधानी टोकियो में हुआ था। 24 मई से एक जून 1958 के बीच इसका आयोजन हुआ, जिसमें 20 देशों के 1820 खिलाड़ियों ने 13 स्पर्द्धाओं में भाग लिया था। पिछली बार वर्ष 1954 के मुक़ाबले इस बार पाँच स्पर्द्धाएँ ज़्यादा थीं। एशियाई खेलों में पहली बार मशाल की परंपरा भी प्रारम्भ की गई थी।

जकार्ता- 1962: चौथे एशियाई खेल 24 अगस्त से चार सितंबर 1962 के बीच इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित हुए थे।इजरायल और ताइवान के खिलाड़ी इन खेलों में हिस्सा नहीं ले सके थे। अरब देशों और चीन के दबाव के चलते इंडोनेशिया सरकार ने इजरायली और ताइवानी खिलाड़ियों और प्रतिनिधियों को वीज़ा देने से इनकार कर दिया था।ऐसा एशियाई खेल महासंघ के नियमों के विरुद्ध था। चौथे एशियाई खेल में 16 देशों के 1460 खिलाड़ियों ने भाग लिया। चौथे एशियाई खेलों में पहली बार बैडमिंटन को शामिल किया गया था। राष्ट्रपति सुकर्णो ने आधिकारिक तौर पर खेलों के उद्घाटन की घोषणा की थी।

बैंकॉक - 1966: पाँचवें एशियाई खेल 9 से 20 दिसंबर 1966 के बीच थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित हुए। ताइवान और इजरायल की खेलों में वापसी हुई।18 देशों के ढाई हज़ार खिलाड़ी और अधिकारी खेलों में शामिल हुए थे।महिलाओं के वॉलीबॉल को पाँचवें एशियाई खेल में शामिल किया गया था।थाइलैंड के महाराज भूमिबोल अदुल्यदेज ने खेलों का उदघाटन किया था।

बैंकॉक - 1970: छठें एशियाई खेल का आयोजन 24 अगस्त से 4 सितंबर 1970 के बीच बैंकॉक में ही हुआ था।दक्षिण कोरिया के राजधानी में इसका आयोजन होना था परंतु उत्तर कोरिया से सुरक्षा को धमकी के कारण दक्षिण कोरिया ने खेलों का आयोजन करने में असमर्थता व्यक्त कर दी थी इस कारण थाइलैंड ने पुनः इन खेलों का आयोजन करना स्वीकार किया।दक्षिण कोरिया के धन का इस्तेमाल करते हुए थाइलैंड ने खेलों का बहुत सफलता से आयोजन किया।18 देशों के 2400 खिलाड़ी और अधिकारी खेलों में शामिल हुए। यॉटिंग को पहली बार इस खेल में सम्मिलित किया गया। थाइलैंड के महाराज भूमिबोल अदुल्यदेज ने खेलों का उदघाटन किया था।

तेहरान - 1974: सातवें एशियाई खेल 1 से 16 सितंबर 1974 के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित किए गए थे। आयोजकों द्वारा इन खेलों के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए आज़ादी खेल परिसर बनवाया। इस खेल में 25 देशों के 3010 खिलाड़ी शामिल हुए जो कि तब तक का सबसे बड़ा आयोजन था। तलवारबाज़ी, जिम्नास्टिक्स और महिलाओं का बास्केटबॉल को सातवें एशियाई खेल में स्थान मिला।खेल राजनीति का भी शिकार हुई, अरब मूल के देशों, पाकिस्तान, चीन और उत्तर कोरिया ने इजरायल के विरुद्ध टेनिस, तलवारबाज़ी, बास्केटबॉल और फ़ुटबॉल के मुक़ाबलों में खेलने से इनकार कर दिया था।

बैंकॉक - 1978: आठवें एशियाई खेल 9 से 20 दिसंबर 1978 के बीच बैंकॉक में पुनः आयोजित किए गए।बांग्लादेश और भारत के साथ तनाव के कारण पाकिस्तान ने एशियाई खेलों का आयोजन करने से इंकार कर दिया।सिंगापुर ने भी वित्तीय कारणों से खेलों का आयोजन करने में असमर्थता दिखाई।एक बार फिर थाइलैंड मदद करने आगे आया और खेल बैंकॉक में आयोजित हुए।राजनीतिक कारणों से इजरायल को खेलों से बाहर कर दिया गया था। 25 देशों के 3842 खिलाड़ियों ने विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया। तीरंदाज़ी के साथ ही बोलिंग को भी आठवें एशियाई खेल में शामिल कर लिया गया था ।

नई दिल्ली - 1982: नौवें एशियाई खेल 19 नवंबर से 4 दिसंबर 1982 के बीच नई दिल्ली में आयोजित हुए। यह दूसरा मौक़ा था जब देश में एशियाड का आयोजन किया गया। ये एशियाई खेल, एशियाई ओलंपिक परिषद के नेतृत्त्व में हुए थे क्योंकि एशियाई खेल महासंघ को भंग करके एशियाई ओलंपिक परिषद का गठन किया गया था।33 देशों के 3411 खिलाड़ियों ने खेलों में भाग लिया। घुड़सवारी, गोल्फ़, हैंडबॉल, नौकायन और महिलाओं की हॉकी को पहली बार नौवें एशियाई खेल में स्थान मिला। पहली बार खेलों में चीन ने जापान की जगह सर्वाधिक पदक जीतने वाला बना। नौवें एशियाई खेल का उदघाटन राष्ट्रपति ज़ैल सिंह के कर कमलों द्वारा हुआ था।यह खेल जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित किए गए थे।

सोल- 1986: दसवें एशियाई खेल 20 सितंबर से 5 अक्तूबर 1986 के बीच दक्षिण कोरिया के सोल में आयोजित किए गए थे।इन खेलों में 27 देशों के 4839 खिलाड़ी शामिल हुए।जूडो, ताइक्वांडो, महिलाओं की साइक्लिंग और महिलाओं की निशानेबाज़ी को दसवें एशियाई खेल में शामिल किया गया।इन खेलों में 83 एशियाई रिकॉर्ड और तीन विश्व रिकॉर्ड टूटे। पीटी उषा इन खेलों की स्टार एथलीट रही जिन्होंने चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था ।दक्षिण कोरिया ने अपने बहुत अच्छे प्रदर्शन से जापान को हटाकर पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।

बीजिंग-1990: ग्यारहवें एशियाई खेलों का आयोजन 22 सितंबर से 7 अक्तूबर 1990 के बीच चीन के बीजिंग शहर में हुआ।37 देशों के कुल 6122 खिलाड़ियों ने भाग लिया। ग्यारहवें एशियाई खेलों कुल 29 स्पर्द्धाएँ हुईं। खेलों में सॉफ़्टबॉल, सेपक टाकरॉ, वुशु, कबड्डी और कनूइंग को भी शामिल किया गया। इन खेलों में सात विश्व रिकॉर्ड और 89 एशियाई रिकॉर्ड टूटे थे।

हिरोशिमा - 1994: बारहवें एशियाई खेल 2 से 16 अक्तूबर 1994 के बीच जापान के हिरोशिमा शहर में आयोजित किया गया।इस बार खेलों का मुख्य संदेश एशियाई देशों में शांति और सौहार्द को बढ़ाना था। क्योंकि वर्ष 1945 में इस जगह पर पहला परमाणु बम गिराया गया था। पूर्व सोवियत संघ से स्वतंत्र हुए कज़ाख़स्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़बेकिस्तान को भी एशियाड खेलों में शामिल किया गया।यह पहला एशियाई खेल था जो किसी देश की राजधानी में आयोजित नहीं किए गए थे।42 देशों के 6828 खिलाड़ियों ने स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और कुल 34 प्रतियोगिताएँ आयोजित हुईं। बेसबॉल, कराटे और आधुनिक पेंटाथलन को खेल में स्थान मिला।

बैंकॉक - 1998: तेरहवें एशियाई खेल 6 से 20 दिसंबर 1998 के बीच बैंकॉक में आयोजित हुए।खेलों में कुल 41 देशों ने हिस्सा लिया यह चौथा मौक़ा था जब बैंकॉक में खेलों का आयोजन हुआ।थाइलैंड के राजा भूमिबोल अदुल्यदेज ने खेल का उदघाटन किया।

बुसान- 2002: चौदहवें एशियाई खेलों का आयोजन 29 सितंबर से 14 अक्तूबर 2002 के बीच दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में हुआ।44 देशों के 6572 खिलाड़ियों ने खेलों में हिस्सा लिया। कुल 38 प्रतियोगिताएँ हुई। खेलों के इतिहास में पहली बार एशियाई ओलंपिक परिषद के सभी 44 सदस्य देश शामिल हुए।उत्तर कोरिया और अफ़ग़ानिस्तान भी खेलों में शामिल हुए।

क़तर- 2006: पन्द्रहवें एशियाई खेल क़तर के दोहा शहर में 1 से 15 दिसंबर 2006 के बीच आयोजित हुए। कुल 29 खेलों की 46 स्पर्द्धाएँ आयोजित हुईं। एशियाई ओलंपिक परिषद के सभी 45 देशों ने इन खेलों में हिस्सा लिया। गुआंगज़ौ 2010: एशियाई खेलों का 16वाँ संस्करण नवंबर 2010 में गुआंगज़ौ में हुआ।इस प्रकार गुआंगज़ौ वर्ष 1990 के मेजबान बीजिंग के नक्शेकदम पर चलते हुए खेलों की मेजबानी करने वाला चीन का दूसरा शहर बन गया।45 राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के कुल 9,704 खिलाड़ियों ने 42 खेलों में भाग लिया।चीन के प्रधान मंत्री वेन जियाबाओ ने आधिकारिक तौर पर गुआंगज़ौ ओलंपिक स्टेडियम में गुआंगज़ौ 2010 की शुरुआत की।मेजबान चीन ने 199 स्वर्ण, 119 रजत और 98 कांस्य के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।सोलहवीं एशियाड में कुल 1,577 पदक प्रदान किये गये।

इंचियोन 2014: एशियाई खेलों का 17वां संस्करण 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2014 तक इंचियोन, दक्षिण कोरिया में हुआ।यह तीसरी बार था जब दक्षिण कोरिया ने एशियाड खेलों का सफल आयोजन किया था।45 राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के कुल 9,501 खिलाड़ियों ने 36 खेलों की प्रतिस्पर्धा में भाग लिया। खेल का नारा था "विविधता यहाँ चमकती है”।इसका आधिकारिक तौर पर उद्घाटन इंचियोन एशियाड मुख्य स्टेडियम में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हे द्वारा किया गया था।यहाँ फिर, चीन ने 151 स्वर्ण, 109 रजत और 85 कांस्य के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। पूरी प्रतिस्पर्धा में कुल 1,454 पदक प्रदान किये गये जकार्ता और पालेमबांग 2018 : 18वें एशियाई खेल 2018 की मेजबानी मूल रूप से हनोई में वियतनाम द्वारा की जानी थी परन्तु आर्थिक आधार पर देश ने अपनी बोली वापस ले ली।वियतनाम के हटने के बाद, इंडोनेशिया ने 18वें एशियाई खेल आयोजित करने की पेशकश की। 18 वें एशियाई खेल 18 अगस्त से 2 सितंबर 2018 तक आयोजित किये गये।हालाँकि मेजबान के रूप में उल्लेखित एकमात्र शहर जकार्ता और पालेमबांग है। परंतु पश्चिम जावा (जावा बारात) की राजधानी बांडुंग ने भी कई कार्यक्रमों की मेजबानी की और साथ ही पश्चिम जावा के कुछ और शहरों जैसे बोगोर, बेकासी, सिकरंग, सुबांग और डेपोक ने भी खेल हुए।पेनकैक सिलाट, वुशु, जुजुत्सु, पैराग्लाइडिंग और जेट-स्की के साथ-साथ ई-स्पोर्ट्स को पहली बार एशियाई खेलों में स्थान मिला। जकार्ता, पालेमबांग और अन्य शहरों ने 462 खेल प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया गया।।खेलों की आधिकारिक शुरुआत इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने की।खेलों में एशिया ओलंपिक परिषद के सभी 46 सदस्यों ने भाग लिया।चीन पुनः पदक तालिका में शीर्ष स्थान पर रहा ।

हांगझोऊ, चीन 2022: 19वें एशियाई खेल आधिकारिक तौर पर बहु-खेल कार्यक्रम था जो 23 सितंबर से 8 अक्टूबर 2023 तक हांगझोऊ, चीन में आयोजित किया गया था। एशियाई ओलंपिक परिषद और एशियाई पैरालंपिक समिति के कई अधिकारियों द्वारा खेलों को अविश्वसनीय सफलता के रूप में सराहा गया। इस खेल का “सिद्धांत,दिल से दिल, भविष्य राष्ट्र का” था। इन खेलों में कुल 45 देशों ने भाग लिया। इसमें 11,909 खिलाड़ियों ने भाग लिया। खेलों का आधिकारिक उद्द्घाटन शी जिनपिंग, चीन के राष्ट्रपति द्वारा हांग्जो स्पोर्ट्स पार्क स्टेडियम में किया गया था। 2026 में अगला 20 वां खेल जापान में आइची-नागोया, 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच आयोजित किया जाएगा।वर्ष 2030 में दोहा और वर्ष 2034 में रियाद में एशियाड प्रस्तावित है।

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